कुछ अलग सा

If you are a friend, you will know.

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चल बता वह कौनसी बात है,
जिसका तुझे आज भी एहसास है.
हसी के पीछे कुछ तो है,
दोस्त हु तेरा, इसीलिए मुझे आभास है.

चाल में तेरे आज भी वही रफ़्तार है,
बातो में तेरे आज भी वही ठहराव है,
दिखने में तू आज भी है वैसा,
पर आँखों तेरी कुछ उदास है.

तू सुनता है पर कहता कुछ नहीं,
हसाता है पर खुद हस्ता नहीं,
संभालता है पर खुद सम्भला नहीं,
दोस्त, यह बात तो सही नहीं.

मानता हु तू तकलीफ में है,
छुपाना तू अब सीख गया है.
अगर आज नहीं आया तो कब काम आऊंगा,
दोस्त हु तेरा, शायद तू भूल गया है.

2 thoughts on “कुछ अलग सा

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