सफर

Almost all the time I see that people work to achieve something. They work hard and in the end either they fail or they feel discontent after reaching said Goal.

This happens because we don’t really think things through. So before you start for your goal, just make sure that you really want it.

 

 

फिर से चल पड़ा है तू उस सफर पर
जहा तुझे बस मंज़िल की आस है.
फिर से चल पड़ा है तू उस सफर पर
जहा तुझे बस मंज़िल की आस है.

और फिर से भूल गया है तू,
के रास्तो में ही मिलती जीत या हार है.

किसी और की मंज़िल को तूने अपना समझ
अपने आप को धोका दिया
किसी और की मंज़िल को तूने अपना समझ
अपने आप को धोका दिया

चलने से पहले एक बार तो पूछ लेता,
तूने वही मंज़िल को क्यों चुना?

कामियाब हो तू हर सफर पे
दुआ यही रहेगी मेरी.
कामियाब हो तू हर सफर पे
दुआ यही रहेगी मेरी.

पर उस कमियाबा का क्या लाभ
जहा ख़ुशी नहीं है तेरी.

फिर से चल पड़ा है तू उस सफर पर
जहा तुझे बस मंज़िल की आस है.
निकलने से पहले जरूर पूछ लेना खुद से,
वह क्या है जिसकी तुझे सच में तलाश है.

2 thoughts on “सफर

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