क्या तुमने वह बात सुनी

Mental Health, one of my blog’s primary focus, is no joke. To all those who are reading and to The Poet and the Pen family, I request you to please share your pain if you have any. Don’t keep it inside you. I am here.

 

 

क्या तुमने वह बात सुनी
अरे वही जो में इतने दिनों से कह रहा था ?
अगर सुनते तो शायद पूछना न पड़ता.

अच्छा यह बताओ, अब सुन रहे हो
या अब भी सुनाई नहीं दे रही ?
या शायद तुम्हे कोई फर्क ही नहीं पड़ता.

अब तो मुझे भी फर्क नहीं पड़ता,
न किसी और से न अपने आप से.
शायद में कुछ दिन और लड़ता,
अगर में यह जंग समझ सकता.

सब कुछ समझ आ जाये यह तो जरुरी नहीं,
ज़िन्दगी सबकी सवार जाये यह तो जरुरी नहीं,
घिरा हुआ होने से अकेलापन दूर हो जाये यह तो जरुरी नहीं,
मेरी बिना आवाज़ वाली बात तुम्हे सुनाई दे जाये, यह तो जरुरी नहीं.

खैर, आपसे मिलके बहुत अच्छा लगा,
आता रहूँगा आपके नज़रो में कभी कबार.
किसी और का तो पता नहीं पर मुझे मेरा दर्द सच्चा लगा,
इसीलिए पूछ रहा हु एक आखिरी बार…

क्या तुमने वह बात सुनी.

 

 

I know this feeling. I have been through this as well. Yes, I was once depressed.

I know that you want to share and that you think no one is there but trust me, I am. 

If you want to share anything with me through any way whatsoever, just reach out. 

-Nishant, The Poet and the Pen.

5 thoughts on “क्या तुमने वह बात सुनी

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