एक अनजान शहर


एक अनजान शहर मुझे अपना सा लगने लगा है,
पता नहीं क्यों, पर अपनी मंज़िल सा लगने लगा है.
अरे अभी तो आया था में यहाँ,
पर अब तो दिल भी यही का होने लगा है.

इस शहर ने बहुत प्यार दिया,
एक नया जीवन सा दिया,
दोस्तों के नाम पे एक परिवार सा दिया,
एक अजनबी को अपना नाम दिया.

यहाँ इतिहास भी है और भविष्य भी,
प्यार भी है और नफरत भी.
रफ़्तार है और ठराव भी,
दिन में रात और रात में दिन भी.

दिल का है यह शहर,
दिल से ही प्यार होता है.
इसकी हवा में अलग सी है लेहेर,
यहाँ कुछ तो अलग सा बस्ता है.

एक अनजान शहर अब जाना पहचाना सा लगता है,
अरे अभी तो आया था में यहाँ,
यहाँ समय का पता भी नहीं लगता है.
यह वह शहर है जो बात कर सकता है.

Youths of the City


It’s time someone spoke about the sacrifice and the hard work that the Youth of a city does. Youths of the city, give yourselves a round of applause. You deserve it. 🙂

Don’t let the glimmering lights trick you,

Fancy rides freak you, Lavish sites flick you,

Astounding Amenities rick you.

For the Youth of the City is sick too.

Denounce the false proposition,

“City life is easy and grand”.

If you really need to know the situation,

Just see the Youths of the City as they stand.

Life revolves from Monday to Friday,

With weekends spent detoxing.

Young minds with tired eyes say,

How Citylife can be enforcing.

Youths of the city, cheers to you,

For doing what you do.

Citylife which seems so easy,

Is because you make it true.

~Youth from a City