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क्या लगता है?

After over two years of Blogging in English, I am here to surprise my readers…

I do not only write Poems in English, I have another side to my Poetry.

Hindi Poetry…

Yes, for the first time let me show you my creation in Hindi and to all the Non-hindi folks, I request you to please listen the audio and feel the beauty of my mother tongue, the beauty of this evergreen Indian Language.

So, with love and creativity from this beautiful land of Hindustan (India), read to know…know to read, A Poem in Hindi.

क्या लगता है?

जाने अनजाने में बिना जाने, तुमने कहा..
में गलत हूँ.
बात हमारी बिना सुने बिना माने, तुमने कहा…
में गलत हूँ.

क्या लगता है, सही हूँ या गलत?

जो कोई नहीं जनता वह तुम जानते हो,
अपने ही सच को सही मानते हो,
सुनवाई से पहले फैसला सुनाते हो,
आधे सच की कहानी बनाते हो.

क्या लगता है?

एक बार तो पूछा होता,
शायद सही कोई दूजा होता,
आज न सब इतना उलझा होता,
यह किस्सा न अधूरा होता.

हमारी सबसे बड़ी गलती यही है,
हमे लगता है हम हमेशा सही है.
जिसने जो कहा अगर उसकी पहचान वही है,
तो मुझे लगता है, गलती यही है.

सच का कोई रूप नहीं होता,
सच सिर्फ सच होता है.
सच ढूंढ़ते तोह शायद में न खोता,
आधा सच कभी पूरा नहीं होता.

 

  • Never make out the whole story by knowing only half the truth.