Category Archives: Hindi Poem

एक बात बताता हूँ

In the world of freedom and social media, I find it funny that people are facing more and more difficulty in expressing themselves. The constant fear of being judged and being looked down upon has made an entire generation a closed book.

Most common cause of depression is the absence of proper emotional outlet.

Something is not right, and I guess we all know what that something is. Let us encourage each other to speak our hearts out. Speak up, let your feelings to come out into the world and make sure you do the same for others.

I dealt with a problem similar to this some time back and it is daunting. A poet who plays with words looking for ways to express himself is both funny and sad at the same time.

I promise to be an ear for all those who need to speak for I know how important it is to speak up and get heard.

The Poet and the Pen is all ears and will be always there if someone needs an ear. But for now, let me tell you what I want everyone to hear. Come, I need to tell you something.

 

एक बात बताता हूँ

आओ तुम सबको एक बात बताता हूँ,
जो दिल में है उससे जुबान से सुनाता हूँ,
जीवन का मंत्र या कोई सीख नहीं,
बस अपने मन की बात कहना चाहता हूँ.

आसान नहीं है यह.

आसान नहीं है यह, मन की बात.
गलत का पता नहीं पर सही पे भी चोटिल होते है जज़्बात,
कब तक ध्यान रखु में?
क्यों न अपने मन की बात करू में?

किसीको बुरा न लगे तो एक बात कहना चाहता हूँ,
किसीको बुरा न लगे तो यह साफ करना चाहता हूँ,
यह मेरे दिल की बात है, इससे आपका कोई नाता नहीं,
सुन सको तो सुनने क्युकी में तुम्हे बुलाता नहीं.

कहने दो जिसे जो कहना है,
उसके मन की बात है.
नहीं होता तो क्यों सुन्ना है,
बात तो सिर्फ जज़्बात है.

आओ एक बात बताता हूँ,
बोलने की आज़ादी मांगता हूँ,
कौन क्या सोचेगा नहीं पता पर,
दर्द होता है जब अपनी बात कह नहीं पता हूँ.

ख्वाइश

ख्वाइश = Wish. Wish is what we all do, but wish is never true.

Read to know…know to read.

English version to come soon. 🙂

मेरी एक ख्वाइश है
जिसमें छिपी कुछ फरमाइश है
न जाने क्या गुंजाईश है
कुछ तो है जिसकी रिहाइश है.

ख्वाइश क्या है?

हर वह चीज़ जो मेरे पास नहीं,
मुझे उसकी ख्वाइश है.
हर वह गुण जिसका मुझे एहसास नहीं,
मुझे उसकी ख्वाइश है.
हर वह बात जिसमें मेरी आवाज नहीं,
मुझे उसकी ख्वाइश है.

जो भी हमारे पास नहीं, हमे उसी की ख्वाइश होती है.
जानकार होते हुए भी जो हम न माने, वही से इसकी शुरुवात होती है.

ख्वाइश क्या होती है?

ख्वाइश वह है जो सच नहीं,
सच का मुखौटा पेहेनके आती है.
और सच वह है जो ख्वाइश नहीं,
जीवन का सार बन जाती है.

ख्वाइश वह है जो हमसे यह कहती है, “अभी तुम लायक नहीं”
लायक बनन्ना पड़ता है, ख्वाइश की कोई बात नहीं.
जो ठान लो उससे सपना बना लो,
सपनो की कोई रात नहीं,
मेरी ख्वाइश यही रहेगी,
सपने पूरे कर सकू, फर्याद नहीं.

क्या लगता है?

After over two years of Blogging in English, I am here to surprise my readers…

I do not only write Poems in English, I have another side to my Poetry.

Hindi Poetry…

Yes, for the first time let me show you my creation in Hindi and to all the Non-hindi folks, I request you to please listen the audio and feel the beauty of my mother tongue, the beauty of this evergreen Indian Language.

So, with love and creativity from this beautiful land of Hindustan (India), read to know…know to read, A Poem in Hindi.

क्या लगता है?

जाने अनजाने में बिना जाने, तुमने कहा..
में गलत हूँ.
बात हमारी बिना सुने बिना माने, तुमने कहा…
में गलत हूँ.

क्या लगता है, सही हूँ या गलत?

जो कोई नहीं जनता वह तुम जानते हो,
अपने ही सच को सही मानते हो,
सुनवाई से पहले फैसला सुनाते हो,
आधे सच की कहानी बनाते हो.

क्या लगता है?

एक बार तो पूछा होता,
शायद सही कोई दूजा होता,
आज न सब इतना उलझा होता,
यह किस्सा न अधूरा होता.

हमारी सबसे बड़ी गलती यही है,
हमे लगता है हम हमेशा सही है.
जिसने जो कहा अगर उसकी पहचान वही है,
तो मुझे लगता है, गलती यही है.

सच का कोई रूप नहीं होता,
सच सिर्फ सच होता है.
सच ढूंढ़ते तोह शायद में न खोता,
आधा सच कभी पूरा नहीं होता.

 

  • Never make out the whole story by knowing only half the truth.