In my mind I am not me

An unsettling unsure persona

Of self is conflicting today.

In my mind I am not me.

It is different what we both say.

Good thoughts are uttered badly

And skepticism is always high.

Simultaneous smiles are seen rarely

For one speaks truth and the other lies.

Lost is the bond now

Which is required to strike a balance.

Now it is all about how

I balance this imbalance.

 

खेल

 

एक खेल खेला करते थे हम.
खेल के कुछ नियम हुआ करते थे.
जीत और हार से टटोलते थे मन
छोटी छोटी बातो पे झगड़ा करते थे.
काफी नोक झोक हुआ करती थी
लड़ाईया भी हुआ करती थी
पर पता है उन सबके बाद भी
खेल की गाडी नहीं रूकती थी.
सब कुछ भूल के अगले दिन फिरसे एक खेल खेला करते थे हम.

अब खेलने के दिन गए शायद
नियम के बंधन भी मिट गए शायद
रोज़ रोज़ मिलना भी काम हो गया शायद
पार छोटी छोटी बातो में झगडे आज भी होते है
और फिरसे वह दो दोस्त साथ में कभी नहीं खेलते है.
शायद समझदार बनते बनते समझ कम हो जाती है,
दोस्ती बिना किसी बात के कहानी बन के रह जाती है,
जो बात बचपन में पता थी आज नहीं समझ आती है,
सिर्फ खेल बदला है, पर हम तो आज भी वही साथी है.