उम्मीद

कहते है उम्मीद लगाना अच्छी बात नहीं. में कहता हु यह बात सही नहीं.

 

उम्मीद

मेरी एक आदत बहुत बुरी है
मुझे उम्मीद रहती है
और कही न कही सबसे रहती है.

गलती उसकी नहीं जिससे उम्मीद हो
क्युकि उसे तो पता भी नहीं.
बस मेरे ही मन में दबी रहती है.

बहुत समझाता हु खुद को
उम्मीद खुद से कर दुसरो से नहीं.
पर क्या करू? हो जाती है,

सबको होती है, उम्मीद…

हर बात की कोई न कोई वजह जरूर होती है,
मेरी उम्मीद की भी है और
जो उसपे खरे नहीं उतरते उनके भी.

बस इतनी सी बात ही समझनी होती है.

यह ऐसा खेल है जो शायद ही कोई जीत पता है,
और शायद इसमें हारना ही सही है,
क्युकि उम्मीद वही लगा पता है
जिससे दुसरो की उम्मीदें जुडी है.