धुंदली हस्सी

वह हस्सी अब धुंदली दिखती है,
जिस पर मुझे नाज़ हुआ करता था…

आँखे भी अब कहा सच देखती है,
सच न जाने क्या हुआ करता था…

जब रौशनी गिरती है चेहरे पे,
उसके पीछे का अँधेरा ज्यादा दिखता है…

सुबह का सूरज नया दिन नहीं लाता,
रात की नींद दिन में मिलती है…

फिर भी यह दुनिया चलती है.
और चलना भी चाइये, क्युकि सही है.

बस एक बार यह धुंधलापन मिट जाये,
वह हस्सी यही कही छिपी है.

When I close my eyes

 

When I close my eyes I see

A smiling face of me.

Maybe it is what I have

or, maybe it is something I hope to be.

Nonetheless, a smile on the face is what

we all hope to keep.

And when I open my eyes post that sight,

that smile somehow comes to me.

Therefore every time I long for a smile,

I close my eyes and just see.

I feel happy.